कैसे होली खेलें साजन...गीत-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
कैसे होली खेलें साजन-
कोरोना वाइरस का भय फैला जन जन-
मुझे भी डर लगता है मै कैसे खेलू होली के रंग-
ये कैसे आन पड़ी आपदा-
बे मैसम बरसात यदा कदा-
कोरोना वाइरस नहीं जुदा...
Posted on: Mar 07, 2020. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
ये हैप्पी क्या है...विचार-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) कन्हैयालाल पड़ियारी संदेश दे रहे हैं:
ये हैप्पी क्या है? हैप्पी होली हो तो बोली भी हैप्पी हो-
ये हैप्पी क्या है? ये अंग्रेजी भाषा में धन्यवाद है-
जब हम हिंदुस्तान में रहते है तो हिन्दू सभ्यता को क्यों भूलते जा रहे हैं, अपनी मातृभाषा का प्रयोग क्यों नहीं कर रहे हैं, अपनी मातृभाषा की अवहेलना ठीक नहीं है अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है उसे भी जानना जरुरी है पर बात पर विदेशी भाषा का प्रयोग ठीक नहीं है अपने ही मातृभाषा को गाली देना है, अपने मातृभाषा का प्रयोग करें जिससे आपसी प्रेम और व्योहार बढे इसी में सबकी भलाई है|
Posted on: Mar 06, 2020. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
कोथो गोगोतिया मोचो कातिया...भजन-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक ओडिया भजन सुना रहे हैं:
कोथो गोगोतिया मोचो कातिया-
गोथो हे-
पहाड़ो भंजी पंडा पोड़ी हरी-
तोडंती दुहारी-
दे बापू चंदन लागी-
तुलसी रो मालो सयोनारो जूलो...
Posted on: Mar 06, 2020. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI ODIA SONG VICTIMS REGISTER
अपनी बोली अपनी ठिठोली...गीत-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
अपनी बोली अपनी ठिठोली-
सबको लागे भली-
दूसर की बोली दूसर की ठिठोली-
लागे बंदूक रायफल की गोली-
अपनी बोली बोलिये सबको लागे भली-
स्वदेशी को अपनाइये उसी में सबकी भलाई...
Posted on: Mar 05, 2020. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
हम इतने नीचे गिर गये हैं कि वापस आना मुस्किल है...
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी अपना विचार व्यक्त कर रहे हैं वे बता रहे हैं कि कुछ वर्ष पहले की बात है जब अपना परिजन जैसे पुत्र, पुत्री, पति, सास, ससुर आदि किसी का निधन हो जाता था तब लोगो द्वारा आपस मिलने पर उसके लिये दुःख व्यक्त करने की प्रथा थी, वह प्रथा अब समाप्त हो रही है, आज लोगो के व्यहार और हाव भाव से प्रतीत होता है कि इंसान को अपनो के जाने पर गम नहीं है, इससे एसा लगता है कि हम इतने नीचे गिर गये हैं कि वापस आना मुस्किल है|
