खाना देते हैं लेकिन खाने के बाद मिठाई नही देते...कहानी-

ग्राम-करकेटा, पोस्ट-जोगा, थाना-उटारी रोड, जिला-पलामू (झारखण्ड) से अखिलेश कुशवाहा एक कहानी सुना रहे हैं, एक बुढ़िया थी जिसके चार बेटे थे, चारो बेटे अपनी माँ खाना देते हैं लेकिन खाने के बाद मिठाई नही देते थे, तो उसने एक दिन सबको कहा जब वे मर जाएगी तो चारो तरफ रसगुल्ला रख देना, उसके बाद वह एक दिन मरने का नाटक करने लगी, तब उसके बेटो ने उसके कहे अनुसार चरो तरफ रसगुल्ले रख दिए और अर्थी उठा कर ले जाने से पहले बेले राम नाम सत्य है, तो बुढ़िया बोली रसगुल्ला बड़ा मस्त है|

Posted on: Jul 22, 2018. Tags: AKHILESH KUSWAHA KAHANI SONG VICTIMS REGISTER

चिट्ठी में है मन का प्यार, चिट्ठी में है घर का अखबार...गीत

ग्राम-केरकेटा, पोस्ट-जोगा, थाना-उदारीरोड (झारखण्ड) से अखिलेश कुसवाहा एक गीत सुना रहे हैं :
चिट्ठी में है मन का प्यार, चिट्ठी में है घर का अखबार-
इसमें दुःख सुख की बातें हैं-
प्यार भरी इसमें सुगंध है-
कितनी ही दिन कितनी ही रातें-
तय कर आई मीलो पार-
चिट्ठी में है मन का प्यार, चिट्ठी में घर का अखबार...

Posted on: Jun 30, 2018. Tags: AKHILESH KUSWAHA SONG VICTIMS REGISTER

देखो कोयल काली है पर मीठी है इसकी बोली...कविता

ग्राम-केरकेट्टा, पोस्ट-जोगा, थाना-ओदारीरोड, जिला-पलामू (झारखण्ड) से अखिलेश कुसवाहा एक कविता सुना रहे हैं :
देखो कोयल काली है पर मीठी है इसकी बोली-
इसने ही तो कूक-कूक कर आमो में मिश्री घोली-
कोयल कोयल सच बतलाओ क्या संदेशा लाई हो-
बहोत दिनो के बाद फिर इस डाली पर आई हो-
क्या गाती हो किसे बुलाती हो, बतला दो कोयल रानी-
कैसे कैसे देख मांगती हो, क्या मेघो से पानी...

Posted on: Jun 24, 2018. Tags: AKHILESH KUSWAHA SONG VICTIMS REGISTER

जंगल मोर के बिना, कि दारू कोर के बिना, और सुनी है बाराते दारू...बुन्देलखंडी लोकगीत

ग्राम-गोण, पोस्ट-थनरा, थाना-दिनारा, जिला-शिवपुरी (छत्तीसगढ़) से अखिलेश कुमार पारश एक बुन्देलखंडी लोकगीत सुना रहे है:
जंगल मोर के बिना, कि दारू कोर के बिना-
और सुनी है बाराते दारू, कोर के बिना-
न्याव्ह कोट बिन, चुनर गोट बिन, दूल्हा कोट बिना-
कि मझली काकी वोट न डाले, 100 के नोट बिना-
बिन चोर के बिना, दारू होर के बिना-
और सुनी है बाराते दारू, कोर के बिना-
जंगल मोर के बिना, कि दारू कोर के बिना...

Posted on: May 25, 2018. Tags: AKHILESH KUMAR PARAS SONG VICTIMS REGISTER

हे शारदे माँ, हे शारदे माँ, अज्ञानता से हमें तार दे माँ...सरस्वती वंदना

जिला-शिवपुरी, (मध्यप्रदेश) से अखिलेश कुमार पारश सरस्वती वंदना गीत सुना रहे है:
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ, अज्ञानता से हमें तार दे माँ-
तू शल की देवी, ये संगीत तुझसे, हर शब्द तेरा हर गीत तुझसे-
हम अकेले हम है अधूरे, विद्द्या का हमको भी अधिकार दे माँ-
मुनियों ने समझी, गुणियों ने जानी, वेदों की भाषा, पुराणों की वाणी-
हम भी तो समझे, हम भी तो जाने-
तेरी शरण हम, हमें प्यार दे माँ, हे शारदे माँ-
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ, अज्ञानता से हमें तार दे माँ...

Posted on: May 07, 2018. Tags: AKHILESH KUMAR PARAS SONG VICTIMS REGISTER

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