मोर छत्तीसगढ़ के भुइयां मा चिराईयां बोले न...गीत-
ग्राम-कोटया, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक गीत सुना रहे हैं:
चिराईयां बोले संगी चिराईयां बोले न-
मोर छत्तीसगढ़ के भुइयां मा चिराईयां बोले न-
सबके मन डोले न-
मोर छत्तीसगढ़ के भुइयां मा चिराईयां बोले न-
चिराईयां बोले संगी चिराईयां बोले न...
Posted on: Mar 23, 2020. Tags: CG MEWALAL DEWANGAN SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
जय जगत पुकारे जा...गीत-
जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से नरेश बुनकर एक गीत सुना रहे हैं:
जय जगत पुकारे जा, सिर अमन पे वारे जा-
सबके हित के वास्ते अपना सुख बिसारे जा-
प्रेम की पुकार हो,सबका सबसे प्यार हो-
जीत हो जहान की क्यो किसी की हार हो-
न्याय का विधान हो सबका हक समान हो-
सबकी अपनी हो जमीन, सबका आसमान हो-
रंग भेद छोड़ दो, जात पात तोड़ दो...
Posted on: Mar 23, 2020. Tags: CG KABIRDHAM NARESH BUNKER SONG VICTIMS REGISTER
हर देश मे तू, हर भेष मे तू...प्रार्थना गीत-
ग्राम-नवलपुर, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से नरेश बुनकर एक गीत सुना रहे हैं:
हर देश मे तू, हर भेष मे तू-
तेरे नाम अनेक तू एकही है-
तेरी रंगभूमि यह विश्वभरा-
सब खेल में मेलमें तुही तू है-
सागर से उठा बादल बनके-
बादल से फटा जल हो करके-
फिर नहर बना नदियाँ गहरी-
तेरे भिन्न प्रकार तू एकही है...
Posted on: Mar 23, 2020. Tags: CG KABIRDHAM NARESH BUNKER SONG VICTIMS REGISTER
स्वास्थ्य स्वर : मेहंदी का औषधीय उपयोग-
ग्राम-रनई, थाना-पटना, जिला-कोरिया (छत्तीसगढ़) से वैद्य केदारनाथ पटेल मेहंदी का उपयोग बता रहे हैं, यदि सिर में जलन होती हो तो मेहंदी के फूल 4 ग्राम और कटीरा 3 ग्राम लेकर दोनों को रात में पानी में भिगोकर रख दें, और सुबह मिश्री मिलाकर सेवन करें, एसा करने से लाभ हो सकता है, नुस्खा उपयोग करने से पूर्व संपर्क कर पूरी जानकारी लें : संपर्क नंबर@9826040015.
Posted on: Mar 22, 2020. Tags: CG HEALTH KEDARNATH PATEL KORIYA SONG VICTIMS REGISTER
नृत्य संगीत के माध्यम से आदिवासी अपनी परंपरा को बचाये हुये हैं...
ग्राम-ताराडांड, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से संत कुमार धुर्वे बता रहे हैं वे गीत संगीत के माध्यम से कार्यक्रम करते हैं, वे अपने टीम के साथ जगह – जगह जाकर अपने पारंपरिक गीत नृत्य जैसे सैला, ददरिया, कर्मा, सुवा अदि को दिखाते हैं, इस तरह से वे अपनी गीत संस्कृत को बचाये रखने योगदान दे रहे हैं, वे संदेश दे रहे हैं आदिवासी समुदाय के सभी लोग अपनी भाषा को नहीं जानते हैं तो वे भाषा को जाने और सीखे अपने इलाके की बोली भाषा तो आनी ही चाहिये साथ ही जो आदिवासी समुदाय की भाषा गोंडी है वो उन्हें सिखनी चाहिये|

