आदिवासियों का सांकृतिक गीत संगीत-
जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से उत्तम आतला आदिवासी गीत संगीत सुना रहे हैं| ये एक सामूहिक कार्यक्रम है| जिसमे कई लोग मिलकर ढोल बजाते हैं| नाचते हैं| ये उनका पारंपरिक त्यौहार है| जिसे वे वर्षो से मना रहे हैं|
Posted on: Jun 26, 2019. Tags: CG MUSIC NARAYANPUR UTTAM ATALA
मछली जल की रानी है, रानी है, रानी है...बाल कविता -
ग्राम-गीदम बेड़ा, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से चंद्रिका पोटाई एक बाल कविता सुना रही हैं:
मछली जल की रानी है, रानी है, रानी है-
हांथ लगाओगे तो डर जायेगी-
बहार निकालोगे तो मर जायेगी-
पानी में डालोगे तो तैर जायेगी-
दाना खिलाओगे तो खा जायेगी-
मछली जल की रानी है, रानी है, रानी है...
Posted on: Mar 15, 2019. Tags: CG CHANDRIKA POTAI NARAYANPUR POEM SONG VICTIMS REGISTER
नानी तेरी मोरनी को मोर ले गये, बाकि जो बचा था काले चोर ले गये...कविता-
ग्राम-गीदम बेडा, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से कुमारी चंद्रिका पोटाई एक कविता सुना रही हैं :
नानी तेरी मोरनी को मोर ले गये-
बाकि जो बचा था काले चोर ले गये-
खाते-पीते, मोटे-मोटे चोर बैठे रेल में-
चोरो वाला डब्बा कटके पहुंचा सीधे जेल में-
उन चोरो की खूब खबर ली, मोटे थानेदार ने-
मोरो को भी खूब नचाया जंगल की सरकार ने...
Posted on: Mar 15, 2019. Tags: CG KUMARI CHANDRIKA POTAI NARAYANPUR SONG VICTIMS REGISTER
10 साल पहले गांव छोड़कर आए थे अब यहीं रहकर खुश हैं...
शांति नगर, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से रुधेश्व सलाम ईंट बनाने का काम करते हैं| वे बता रहे हैं कि नक्सल वादियों के डर से अपना गांव छोड़कर उस जगह पर आ गये और रहने लगे, तब से उसी गांव में रह रहे हैं | उन्हें गांव में रहते दस साल हो चुके हैं| अब रुधेश्वर उसी गांव में रहना चाहते हैं, वापस नहीं जाना चाहते| उनका कहना है अब जीवन पहले से अच्छा है| चार बच्चे हैं, पहले मजदूरी का काम करते थे, अब ईंट बनाने का काम करते हैं और उसी से जीवन यापन करते हैं|
Posted on: Mar 11, 2019. Tags: CG HD GANDHI NARAYANPUR SONG STORY VICTIMS REGISTER
पहले हमारी स्थिती बहोत ख़राब थी, अब कुछ सुधार हो रहा है...कहानी-
शांतिनगर, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से लालसाय कावडे बता रहे हैं, उनकी गाँव की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी और आर्थिक स्थिती भी खराब थी, इस कारण वे शहर में आकर बस गये और वहां काम कर अपना जीवन जीने लगे | अभी वे झोपड़ी बनाकर रहते है और मजदूरी कर अपना घर चलाते हैं, उन्हें सरकार की किसी योजना के बारे में पता नहीं चलता, वे नये लोगो से बात करने से घबराते हैं, आज वो मध्यप्रदेश के सीजीनेट के सांथियो से मिले उनके काम के बारे में जाने तो बहुत अच्छा लगा उनका कहना है कि वे भी लोगो की मदद करने की कोशिश करेंगे | वे लोग 2003-04 से शहर में रह रहे हैं, अभी स्थिति में कुछ सुधार हो गया है |
