रे रे लोयो रेला रे रे ला...गोंडी गीत
सोमदाई पोटाई जिला नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से छत्तीसगढ़ी गोंडी गीत सुना रही है:
रे रे लोयो रेला रे रे ला, रे रे लोयो रेला रे रे ला-
बाता पुंगर बेलसा कोया ना-
होजोर पुंगर बेलसा कोया ना-
बाता पुंगर बेलसा मिचा ना-
होजोर पुंगर बेलसा मिचा ना-
रे रे लोयो रेला रे रे ला, रे रे लोयो रेला रे रे ला...
Posted on: Sep 11, 2019. Tags: CG GONDI NARAYANPUR SAMDAI POTAI SONG
अधुरा शौचालय के गढ्ढे में गिरने से हुई मौत, कारवाही कराने के लिये अपील-
ग्राम पंचायत-भाटपाल, जिला-नारायपुर (छत्तीसगढ़) से दसमती और उनका बेटा कनक बता रहे हैं, अधुरा निर्मित शौचालय के गड्ढ़े में गिरने से उनके पति की मृत्यु हो गयी, उनके पति प्रसाद की उम्र 55 वर्ष थी, उनका कहना है, शौचालय का काम पूरा कर दिये होते तो ऐसी दुर्घटना नहीं होती| FIR दर्ज नही किया गया है, वे सीजीनेट के श्रोताओं से अपील कर रहे हैं| दिये नंबरो पर बात कर मदद करें, जिससे जाँच कर उचित कारवाही हो सके और मुआवजा मिल सके : सरपंच@6265968343. संपर्क नंबर@265667685.
Posted on: Sep 11, 2019. Tags: CG MOHAN YADAV NARAYANPUR PROBLEM SONG VICTIMS REGISTER
दादा दीदी बस्तर काय कूक लाय गांवा...बस्तरिया गीत-
हीरापदर, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से ॐ जय एक लोक गीत सुना रहे हैं :
राम गांव गांवा गांवा रे-
दादा दीदी बस्तर काय कूक लाय गांवा-
बस्तरिया संग गोठियाना-
नोनी बोलेदाव, बाबू बोलेदाव-
गडचु कपाय डूब जवां-
बस्तर ता कुक लाय जंवा-
बस्तरिया संग गोठियाना...
Posted on: Sep 10, 2019. Tags: CG MOHAN YADAV NARAYANPUR SONG VICTIMS REGISTER
मेरे वतन मेरे वतन...गीत-
ग्राम-मुंजमेटा, पंचायत-हलामी मुंजमेटा, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से सरिता वड्डे, रमशीला वड्डे एक गीत सुना रही हैं:
मेरे वतन, मेरे वतन-
कुर्बानियों बाद ये स्वतंत्रता मिली है-
लबों पे मुस्कुराहटे अभी-अभी खिली है-
इस देश के जवान आज किस तरफ चले है-
यह भूल हम चुके है किस गोद में हम पले-
मेरे वतन मेरे वतन...
Posted on: Sep 08, 2019. Tags: CG MOHAN YADAV NARAYANPUR SONG VICTIMS REGISTER
आदिवासी समुदाय नवा खाई का कार्यक्रम कर रहे है....
जिला नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से भोला बघेल, राम लाल पोटाई, श्यामत पोटाई, संकू घावडे बता रहे है | धान की फसल नई बलिया आने पर थोडा सा नया चावल निकाल कर आदिवासी समुदाय के लोग प्रत्येक साल में एक बार नवा खाई का कार्यक्रम करते है पूर्वजों से चल रहे रीतिरिवाजों अनुसार गाँव एंव अपने-अपने घरो के देवी-देवताओं को यह नया चावल चढाते है, जिसके पश्चात उसी बचे चावल को खिर बनाकर घर के सभी सदस्य खाते है | इस नवा खाई का कार्यक्रम आदिवासी समुदाय के सभी लोग मनाते है...
