तू प्यार का सागर है तेरी इक बूंद के प्यासे हम...गीत-

जिला-प्रयागराज (उत्तरप्रदेश) से अभिषेक एक भक्ति गीत सुना रहे हैं:
तू प्यार का सागर है तेरी इक बूंद के प्यासे हम-
लौटा जो दिया तूने चले-
जायेंगे जहाँ से हम-
घायल मन का पागल पंक्षी-
पंख कोमल आंखे धुंधली-
जाना है सागर पार अब तू ही इसे समझा...(AR)

Posted on: Feb 27, 2021. Tags: SONG

श्याम तुमसे मिलने का सतसंग ये बहाना है...भक्ति गीत-

जिला-प्रयागराज (उत्तरप्रदेश) से अभिषेक एक भक्ति गीत सुना रहे हैं:
श्याम तुमसे मिलने का सतसंग ये बहाना है-
दुनिया वाले क्या जाने मेरा रिश्ता पुराना है-
सूरज में ढूंढा तुझे चंदा में पाया है-
तारो के झिल मिल में मेरे श्याम का बसेरा है-
गंगा में ढूंढा तुझे यमुना में पाया है-
सागर की लहरों में मेरे श्याम की बसेरा है-
श्याम तुमसे मिलने का सतसंग ये बहाना है...(AR)

Posted on: Feb 27, 2021. Tags: BHAKTI SONG

दाई मोर पथरा के भगवान...भक्ति गीत-

जिला-जांजगीर चापा (छत्तीसगढ़) से मानस राम यादव भक्ति गीत सुना रहे हैं:
दाई मोर पथरा के भगवान-
हे दाई मोरे पथरा के भगवान-
कोनो ला तैय जुलया बनाये-
कोनो ला धनवान तोही ला-
मैं जानेंव दाई मोर पथरा के भगवान...(RM)

Posted on: Feb 27, 2021. Tags: BHAKTI SONG CG JANJGIRCHAMPA

वनांचल स्वर: घटते जंगल बढ़ती परेशानियां...

ग्राम-हिटारकसा, तहसील-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से नारायण सिंह साहू बताते हैं कि उनके गांव में आए दिन भालू आ जाते हैं। अभी तक जान-माल का कोई नुक्सान नहीं हुआ है, लेकिन भालू अक्सर गन्ने और सब्जी की फसल को खराब कर देते हैं। ग्रामीण कभी भी भालुओं को नुक्सान नहीं पहुँचाते। जंगल कम होने की वजह से वहां फल-सब्जी नहीं मिलता जिस वजह से भालू गांव में भोजन की तलाश में आ जातें हैं। हम लोगो ने गांव में एक वन समिति बनाई है, जो ग्रामीणों को वन के पेड़ों की कटाई करने से रोकते हैं। हमारे गांव में अब जंगल नहीं है बस कुछ झाड़ियां ही बची हैं। संपर्क@9424182008. (RM)

Posted on: Feb 27, 2021. Tags: CG KANKER NARAYANSINGH SAHU VANANCHAL SWARA

वनांचल स्वर: जंगल से मिलता है स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन...

ग्राम-धनेली कन्हार, तहसील-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से प्रेमलाल कोमरा बताते हैं कि इमली के बीज को आग में भूंजकर उसमें महुआ के फूल को डालकर पकाते हैं| तैयार हो जाने पर खाते हैं और बाज़ार ले जाकर बेच देते हैं| सरई के फूल को भी इमली के बीज की तरह भूंजकर उसमें महुआ के फूल को डाला जाता है, इसे मैंने भी खाया है| कांदा जो जंगल में पाया जाता है, इसे घर में नहीं रखा जाता है| कांदा स्वाद में बहुत कड़वा होता है, इसे भी पकाया जाता है, कांदा को अभी भी खाया जाता है| प्रेमलाल महुआ के लड्डू के भी बारे में बताते हैं, महुए के लड्डू बनाने के लिए महुए को सिलबट्टे या मिक्सी से पीसकर बनाया जाता है| ये सभी स्वास्थ्य के लिए अच्छे हैं जैसे इमली भूने हुए बीजों को खाने से पेट साफ़ होता है|(RM)

Posted on: Feb 27, 2021. Tags: CG KANKER PREMLAL KOMRA VANANCHAL SWARA

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