नया-नया वैकल्पिक मीडिया अब आया है भाई...वैकल्पिक मीडिया गीत

जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से सुनील कुमार के साथ मोहन कुमरा तथा और साथी हैं जो मिलकर वैकल्पिक मीडिया पर एक जोगिया गीत सुना रहे हैं:
नया-नया वैकल्पिक मी डिया अब आया है भाई-
नया-नया वैकल्पिक मीडिया अब आया हैं भाई-
समझ बूझलो इसको भैया होगी बहुत भलाई-
समझ बूझलो इसको भैया होगी बहुत भलाई-
तुम अपना बात रखोगे जोगीरा सारा रा रा...

Posted on: Sep 02, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

ए जी पटने से मुडिया मंगाया...झूमर विवाह गीत

ग्राम-विसेंद्र्पुर, जिला-मुजफ्फरपुर, बिहार से गीता देवी एक झूमर विवाह गीत सुना रही हैं:
ए जी पटने से मुडिया मंगाया-
दुल्हे राजा को सैरा पहनाया-
दुल्हे राजा खिलने लगे जीजा हसने लगे-
छोटे साले का दिल हरसाया-
ए जी पटने से चैन मंगाया-
दुल्हे राजा को पहनाया-
दुल्हे राजा खिलने लगे जीजा हसने लगे-
छोटे साले का दिल हरसाया-
ए जी पटने से मुडिया मंगाया...

Posted on: Aug 30, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

चलो मुसाफिर अपने घर अब तो पूरा हुआ सफ़र...हिंदी गीत

मालीघाट मुजफ्फरपुर बिहार से सुनील कुमार एक गीत सुना रहे हैं:
चलो मुसाफिर अपने घर अब तो पूरा हुआ सफ़र-
बुला रहा है वतन तुम्हारा मुख का रुख अब करों उधर-
चलो मुसाफिर अपने घर अब तो पूरा हुआ सफ़र-
दिन वों कितने प्यारे थे, सुख के भरे नज़ारे थे-
धरती अंम्बर चाँद-सितारे सारे हुए हमारें थे-
कब आयेंगे दिन फिर कर याद आते है रह-रहकर-
चलो मुसफ़िर अपने घर...

Posted on: Aug 29, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

नाम जपन क्यों छोड़ दिया, झूठ न छोड़ा, क्रोध न छोड़ा...भक्ति गीत

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक भक्ति गीत सुना रहे हैं:
नाम जपन क्यों छोड़ दिया-
झूठ न छोड़ा, क्रोध न छोड़ा-
सत्यवचन क्यों छोड़ दिया-
झूठे जग में दिल ललचाकर-
असल वतन क्यों छोड़ दिया-
जिहि सुमिरन से अति सुख पावे-
सो सुमिरन क्यों छोड़ दिया-
खालस इक भगवान भरोसे-
तन-मन-धन क्यों न छोड़ दिया...

Posted on: Aug 28, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

जय जगत पुकारे जा, सिर अमन पर वारे जा...गीत

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक गीत सुना रहें हैं:
जय जगत पुकारे जा, सिर अमन पर वारे जा-
सबके हित के वास्ते, अपना सुख बिसारे जा-
प्रेम की पुकार हो, सबका सबसे प्यार हो-
जीत हो जहान की, क्यों किसी की हार हो-
न्याय का विधान हो सबका हक समान हो-
सबकी अपनी हो जमीन, सबका आसमान हो-
रंग भेद छेड़ दो, जात पात तोड़ दो-
मानवों की आपसी, अखण्ड प्रीत जोड़ दो
शांति की हवा चले,जग कहे वले – वले-
दिन उगे स्नेह का,रात रंज की ढ़ले-
जय जगत...

Posted on: Aug 27, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

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