हलत नहिये जी, ढोलत नहिये जी...छत्तीसगढ़ी कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे है:
हलत नहिये जी, ढोलत नहिये जी-
का हो गए बुढवा बाबनला बोलत नहिये जी-
चप्पर-चप्पर मंतर बोलत रहे जी-
अब तो मुंह लगे कछु कहत नहिये जी-
काहित मने मन म गुनत हवे जी-
बिहाव के भावर ला गिन्जारत नहिये जी...

Posted on: Apr 29, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

रेल चली भाई रेल चली, लेकर अपना मकसद ख़ास...बाल कविता

तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़)से कन्हैयालाल पड़ीयारी एक कविता सुना रहे है:
रेल चली भाई रेल चली, लेकर अपना मकसद ख़ास-
घुमा फिरा कर फ़िर ले आया, रख अपना ख़ास विश्वाश – दिल्ली दिखाया बम्बई दिखाया, कलकत्ता से ले गया मद्रास-
छोटा बड़ा सभी जगह दिखाया, पटरी पर ले अपना हास-
स्टेशनों का कर जायेजा, कर सिटी पर अपना विश्वाश-
माल ढ़ोया सवारी चढ़ाया, फ़िर भी न खोया अपना स्वास्थ्य-
रोज़ चलता फ़िर भी नही थकता, वह देखता नही अपने आस-पास...

Posted on: Apr 29, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI SONG VICTIMS REGISTER

बेटी तै जाथस ससुराल वो, बने-बने रहबे...बेटियों पर छत्तीसगढ़ी कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी बेटियों से सम्बंधित एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे है:
बेटी तै जाथस ससुराल वो-
बने-बने रहबे-
मुंह ला रख बे संभाल के-
सांस ससुर ला-
दाई दादा के सम्मान बे-
नन्द देवर ला भाई बहन वो-
जेट जेठानी ला भाई-
बहुजाई के सम्मान बे वो...

Posted on: Apr 29, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

बजगरी मन मगन बाजा बजावत है जी, झेंडा झेड़ी मन मगन नाचत हवे जी...छत्तीसगढ़ी कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी छत्तीसगढ़ी भाषा में एक कविता सुना रहे है:
बजगरी मन मगन बाजा बजावत है जी, झेंडा झेड़ी मन मगन नाचत हवे जी-
जे दिन साथिन मन तेल हल्दी चड़ावत हवे जी, दूल्हा दुल्हिन के मन ह देख नाचत हवे-
वैद मन्त्र बामण सुनाथ हवे जी, आगी के आघु मा भवर इज़ारत हवे जी-
सात भवर हल्दी के सात गाठ, गठीयावत हवे जी-
सात जनम खातिर नाता ला, जोड़त हवे जी-
बियाह के बंधना हवे छन्दना, ज़िदगी भर खातिर हवे सुघर गेहना...

Posted on: Apr 28, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

मया प्रीत के गोठ-गोठिया के, उन्गछा दे त दुनिया भर के सुख ला पाबे...छत्तीसगढ़ी कविता

तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी एक रचना सुना रहे है:
काकरों संग मा लड़बे झन झगड़बे, लड़ाई झगड़ा मा कछुच नई मिले-
मया प्रीत के गोठ-गोठिया के, उन्गछा दे त दुनिया भर के सुख ला पाबे-
हंसी ख़ुशी म ज़िन्दगी कट जाई, दोनों कुल के नाम जस होई-
आगो के रस्ता ला घलो देख, मेनखे जन्म ला पायें हस-
चिराई चिरगुन क झन दी, ऊँद के भंडार ला ते पायें हस-
जनावर पशु मन झन लड़, सुघर जीवनी म ते आय हस-
बिलाई कुकुरकर झन कर, तै हवस पढ़ा लिखा मेनखे...

Posted on: Apr 27, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI SONG VICTIMS REGISTER

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