बहोत सो चुकी अब तो जागो...गीत-
बड़वानी, मध्यप्रदेश से सुरेश कुमार एक गीत सुना रहे हैं:
बहोत सो चुकी अब तो जागो-
ओ नारी कल्याणी-
परिवर्तन के स्वर मे भर दो-
निज गौरव की वाणी-
बन कौशिल्या आज देश को-
और सुने न बनकर फिर से-
सीता की संतान दो-
भारत माता मांग रही है वापस फिर से शान दो...
Posted on: Mar 12, 2021. Tags: BARWANI MP SONG SURESH KUMAR
उठो सुनो प्राची से उगते सूरज की आवाज...गीत-
सुरेश कुमार बड़वानी मध्यप्रदेश से एक गीत सुना रहे हैं:
बड़वानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक गीत सुना रहे हैं :
उठो सुनो प्राची से उगते सूरज की आवाज-
अपना देश बनेगा सारी दुनिया का सरताज-
देश की जिसने सबसे पहले जीवन ज्योति जलाई-
और ज्ञान की किरणें सारी दुनिया में फैलाई-
लोभ मोह के भ्रम से सारे जग को मुक्त कराया-
भ्रात भावना का प्रकाश सारे जग में फैलाया-
अगणित बार बचायी जिसने, मानवता की लाज-
अपना देश बनेगा सारी दुनिया का सरताज...
Posted on: Mar 11, 2021. Tags: BARWANI MP SONG SURESH KUMAR
बेला फूले आधी रात के माला किसके गले डालूँ...गीत-
जिला-बड़वानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक गीत सुना रहे हैं:
बेला फूले आधी रात के माला किसके गले डालूं-
श्याम गले डालूं की राधा गले डालूं-
वे तो रचाये रास-
के माला किसके गले डालूं-
राम गले डालूं की सीता गले डालूं-
सीता जी की लम्बे – लम्बे बाल-
की माला किसके गले डालूं...(AR)
Posted on: Mar 09, 2021. Tags: BARWANI MP SONG SURESH KUMAR
हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं...गीत-
बड़वानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक गीत सुना रहे हैं:
हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं-
रंग रूप, वेश, भाषा चाहे अनेक है-
कोयल की कूक न्यारी पपीहे की टेर प्यारी-
गा रही तराना बुलबुल राग मगर एक है-
गंगा यमुना ब्रह्मपुत्र कृष्णा कावेरी-
हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं...
Posted on: Mar 07, 2021. Tags: BADWANI MP SONG SURESH KUMAR
बुद्धिमान बीरबल -कहानी
जिला-बड़वानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक कहानी बता रहे हैं|
बुद्धिमान-बीरबल, एक बार बादशाह अखबर ने अपने दरबरियो से एक अजीब सा प्रश्न पूछा| ऐसी क्या चीज है जिसे चाँद और सूरज नही देख सकते| सभी दरबारी चुप थे उन्हें उत्तर नहीं मालूम था| कुछ देर सोच कर बीरबल बोले अँधेरा जहाँपना| अकबर उसके उत्तर से बहुत खुश हुए| पर वो अपने दरबारियों की कुछ और प्रश्न पूछ कर परीक्षा लेना चाहते थे| इसलिए उन्हेंने जमीन पर एक लकीर खिंच कर पूछा दोनों किनारों से मिटाए बिना ये लकीर छोटी कैसे की जा सकती है| दरबारी फिर से चुप रह गए| आखिर कोई बिना किनारा मिटाए लकीर को छोटा कैसे कर सकता है| और बीरबल के पास उसका भी हल था उसने धीरे से बादशाह से लकड़ी ली और पहली लकीर के समान्तर एक और लकीर खीँच दी, यह लकीर पहली लकीर से बड़ी थी| फिर वो बादशाह से बोले लीजिए अब आपकी लकीर छोटी हो गयी| (184335)GT
