Impact : मेरा स्कॉलरशिप 900 रूपये आया था, सीजीनेट में रिकॉर्ड करेने के बाद पूरा आ गया है...
जिला-मुंगेली छत्तीसगढ़ से कुमारी राजेश्वरी कक्षा नवमी की छात्रा है जो कि रम्भा भाई रामलाल शा.कन्या हाईस्कूल स्कूल मुंगेली में पढ़ती है उनका स्कॉलरशिप 900 रूपये आया था जबकि अन्य बालिकाओ का 2250-2250 रूपये आया था | तो उन्होंने सीजीनेट स्वर में सन्देश रिकॉर्ड की करने के बाद सीजीनेट के साथियों और अधिकारियो के मदद से उनका पूरा स्कॉलरशिप आ गया है | इसलिए सीजीनेट सुनने वाले साथियों को और अधिकारियो को धन्यवाद दे रही है | जिन्होंने उनकी मदद की | संपर्क नम्बर@9977208835.
Posted on: Jul 03, 2020. Tags: KUMARI RAJESHWARI MUNGELI CG SCOLARSHIP IMPACT SONG VICTIMS REGISTER
जीवन में कुछ करना है तो, मन को मारे मत बैठो...गीत-
आशा गोस्वामी ग्राम-नवलपुर, जिला-मुंगेली राज्य छत्तीसगढ़ से एक गीत सुना रही है:
जीवन में कुछ करना है तो-
मन को मारे मत बैठो-
आगे आगे बढना है तो-
हिम्मत मारे मत बैठो-
चलने वाला मंजिल पाता-
बैठे पीछे रहता है-
ठहरा पानी सड़ने लगता है-
बहता निर्मल होता है-
पाव मिले चलनें के खातिर-
पाव पसारे मत बैठो...
Posted on: Jul 03, 2020. Tags: ASHA GOSWAMI HINDI SONG MUNGELI CG SONG VICTIMS REGISTER
सांवले सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया...गीत-
ग्राम-नवलपुर, पोस्ट-कोतरी, जिला-मुंगेली छत्तीसगढ़ से संध्या नेताम और मानसी गोस्वामी एक गीत सुना रहे है :
सांवले सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया-
एक साथ रहने में फिर से दूसरा काजल लगा-
एक तराना धुल का मिलना दिल दीवाना हो गया...
Posted on: Jul 03, 2020. Tags: HINDI SONG MUNGELI CG SANDHIYA NETAM MANSI GOSWAMI SONG VICTIMS REGISTER
गर्व है मुझे मैं नारी हूँ, गर्व है मुझे मैं नारी हूँ...पंक्तियाँ-
ग्राम-नवलपुर, ब्लाक-लोरमी, जिला-मुंगेली छत्तीसगढ़ से संध्या नेताम महिलाओ पर आधारित कुछ पंक्तियाँ सुना रही है:
गर्व है मुझे मैं नारी हूँ, गर्व है मुझे मैं नारी हूँ-
तोडके हर पिंजरा जाने कब मैं उड़ जाउंगी-
चाहे लाक बिचालो बंदिशे-
फिर भी दूर आसमान में अपनी जगह बनाउंगी-
गर्व है मुझे मैं नारी हूँ, गर्व है मुझे मैं नारी हूँ...
Posted on: Jul 03, 2020. Tags: HINDI LINE MUNGELI CG SANDHIYA NETAM SONG VICTIMS REGISTER
कहां मिलता है चैन पत्थर के इन मकानों में...कविता-
नवलपुर, जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से नेहा बुनकर एक कविता सुना रही हैं, जिसका शीर्षक है : ज़िंदगी के मैदानों में :
कहां मिलता है चैन पत्थर के इन मकानों में-
बहुत कोशिश करते हैं जो खुद का वजूद बनाने की-
हो जाते हैं अपनों से दूर नजर आते हैं बेगानों में-
हस्ती नहीं रहती दुनिया में एक लंबे दौर तक-
आंखिर में जगह मिलती है कहीं दूर श्मसानों में-
कहां मिलता है चैन पत्थर के इन मकानों में... (AR)
