स्कूल मतके नेल्ला नेल्ला मनद नार गड़य बनें आता...गोंडी गीत-
ग्राम पंचायत -कुन्ना,जिला-सुकमा (छत्तीसगढ़) से हूंगाराम मरकाम गोंडी गीत सुना रहे है :
स्कूल मतके नेल्ला नेल्ला मनद नार गड़य बनें आता-
मेरे आँगन में रे पानी रे जम जम-
स्कूल मटके नेल्ला नेल्ला मनद नार पोटरी बनें आता-
मेरे आँगन में रे पानी रे जम जम-
स्कूल मतके नेल्ला नेल्ला मनद नार गड़य बनें आता – मेरे आँगन में रे पानी रे जम जम...(181497) D
Posted on: Jan 05, 2021. Tags: GONDI SONG SUKMA CG
बस्तर के जंगलो में हर प्रकार की उपयोगी चीजें मिलती है...
ग्राम पंचायत बुरगुम, तहसील-बास्तानार, जिला-बस्तर(छत्तीसगढ़) से मुन्ना गाँव के जंगल के बारे में बता रहे है, जंगल का नाम है तुमिढ़ मेट्टा है जंगल में हर प्रकार का उपयोगी लकड़ी मिलती है घर-पर्निचार बनाने के लिए साल, सागौन ,बांस जंगल से लाते है, जंगल को बचाना चाहिए ताकि आने वाले पीढ़ी को काम आएगा जंगल रहने से ही हमें जीवन जीने का अवसर मिलता है लकड़ी ,फल, फुल, पत्ती,औषधि हमें जंगल से ही मिलता है और जंगल में लोमड़ी ,सियार ,भालू जानवर रहते है| (183047)
Posted on: Dec 25, 2020. Tags: AGRICULTURE
फसलों पर चर्चा
ग्राम पंचायत-बुरगुम, ब्लाक-बास्तानार, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से जीवन कुमार और मुन्ना और मड्डा गाँव के फसलो के विषय में चर्चा कर रहे हैं| धान, कोखरा की फसल को बरसात के दिनों में उगाया जाता है| कोसरा को सितंबर माह में उगाया जाता है, दिसम्बर माह में काटते हैं| इसे बाजार में बेचकर अपने जरुरत दूसरी चीजें जैसे-मिर्ची, प्याज, नमक आदि खरीदते हैं | (AR)
Posted on: Dec 22, 2020. Tags: STORY
लेत जन्ना नानो वैय...गोंडी गीत
ग्राम पंचायत-काकलुर, तहसील-बास्तानार, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से कविता पोयाम गोंडी गीत सुना रही हैं:
लेत जन्ना नानो वैय-
हो यायो वैया वैया वैय नानो-
आले वेया केला वैय नानो-
लेत जन्ना नानो वैय-
हो यायो वैया वैय नानो... (AR)
Posted on: Dec 19, 2020. Tags: GONDI SONG
गाँव की कहानी...
ग्राम-मुतनपाल, ब्लाक-बास्तानार, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से गोपी राम पोयाम गाँव की कहानी बता रहे है, गाँव में पहले मुचाकी समुदाय के लोग आये है, बाद में पोयाम समुदाय के लोग आये, जब गाँव में तीन-चार घर थे तब से गाँव में रहा रहे है न उस समय सड़क न गाड़ी-घोड़ा कुछ भी नही थी, उस समय पैदल ही कहीं आना जाना जैसे गीदम,बास्तानार,जगदलपुर पैदल जाना पड़ता था, उस समय कृषि के सम्बन्ध में ज्यादा जानकारी नहीं थी, तो वे ज्यादातर जंगल से ही पत्ती,फल-फुल,कंदमूल आदि खाकर जीवन यापन करते थे,और उस ज़माने में आम तोड़ने,खाने जंगल जाने पर आदमी चोरो और के होने का डर का दहशत फैला रहता था और आज के ज़माने में नक्सलियो का दहशत बना हुआ है|सम्पर्क नम्बर @9406344921, ID(176356)RM
