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मितवा पागल भईले हो लुटे के चक्कर में...कविता -

पारु, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार फिरिये एक कविता सुना रहे हैं:
मितवा पागल भईले हो लुटे के चक्कर में-
मितवा पागल भईले हो-
जीत के चुनाव दिल्ली पहुँच के-
घुमे गले अमेरिका-
देश के खाजाना खूब ही लुटा के-
मितवा पागल भईले हो लुटे के चक्कर में...

Posted on: Nov 17, 2017. Tags: ANIL FIRIYE

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