अरे धोखा में आ गए बुढापा बदल दो मारी जवानी...गीत
तहसील-बैहर,जिला-बालाघाट (म.प्र.) से राजेंद्र सालेजाम बुढापे के सम्बन्ध में एक गीत सुना रहे हैं:
अरे धोखा में आ गए बुढापा बदल दो मारी जवानी-
पहले बुढापे मेरे पैर पे आई,पहले बुढापे मेरे पैर पे आई-
जूता ने लाज बचाई कि जगा दो भरी जवानी-
दूसरा बुढापा मेरे कमर पे आई,दूसरा बुढापा मेरे कमर पे आई-
कतडी ने लाज बचाई जगा दो भरी जवानी-
तीसरी बुढापा मेरे आँखों पे आई, तीसरी बुढापा मेरे आँखों पे आई-
चश्मा ने लाज बचाई, जगा दो भरी जवानी-
चौथी बुढापा मेरे बालो में आई,चौथी बुढापा मेरे बालो में आई-
टोपी ने लाज बचाई कि जगा दो भरी जवानी...
