मोरे माटी के मितान, चल मैं तोरौ किसान....छत्तीसगढ़ी गीत
छत्तीसगढ़ से नरेश बुनकर एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं:
मोरे माटी के मितान, चल मैं तोरौ किसान-
जुर्म अत्याचार ला मिटाए बार करूँ, संघर्ष अव निर्माण-
ये धरती के रखवाला, किसान भोला-भाला-
मेहनतकस मजदुर दुनिया बनाने वाला-
हमार गांव कमाई मा, दुनिया हा जियत है-
कौन बैर-पापी हमार लहू ला पियत है-
भाई नवजवान चला सीना तान-
जुर्म अत्याचार ला मिटाए बार करूं, संघर्ष अव निर्माण...
