साय रेला रे रे रे रेला, साय रेला रे रे रे रेला...गोंडी गीत
ग्राम-मेंढ़ालेखा, तहसील-धनोरा, जिला-गढ़चिरोली, महाराष्ट्र से उमेश्वरी दुग्गा एक गोंडी गीत प्रस्तुत कर रही हैं. गीत, जल-जंगल-जमीन संरक्षण व आदिवासी समाज में होने वाले अनाज कोदो-कुटकी इत्यादि के सन्दर्भ में है:
साय रेला रे रे रे रेला, साय रेला रे रे रे रेला-
गोंड-मुडिया-माड़िया-हल्बा रंग-रंग मा जाति-
खूब सुन्दर उजड़ ते मातु आदिवासी-
पर्रा इन्कट उल्की इन्कट फुल ते के ला इन्कट-
इना लेया पूना लेया मिले मासी इन्कट-
साय रेला रे रे रे रेला, साय रेला रे रे रे रेला-
जल-जंगल-जमीन मावा आदिवासी डा वा-
मेटा-घुटा शिवा धुरा आदिवासी वा-
साय रेला रे रे रे रेला, साय रेला रे रे रे रेला...
