ओ शिल्पी! ओ शिल्पी! तुमको अपनी मूर्ति कला का रंग दिखाना है...शिक्षक गीत
ग्राम-छतरपुर,पंचायत-गजरा, तहसील-घुघरी, जिला-मंडला, मध्य प्रदेश से मोहन मरावी शिक्षकों के संदर्भ में एक गीत प्रस्तुत कर रहे हैं. गीत में शिक्षक की तुलना कुम्हार या शिल्पकार से की गई है :
ओ शिल्पी ! ओ शिल्पी !
तुमको अपनी मूर्ति कला का रंग दिखाना है-
तुझे तो मूर्ति बनाना है-
सत्यम-शिवम-सुन्दरम का नव अलख जगाना है-
जितने अनपढ़ पत्थर तेरे पास धरोहर हैं-
सुन्दर मूरत बनने को सब कितने आतुर हैं-
अपनी मूर्ति कला से सबको सुन्दर बनाना है-
ओ शिल्पी! तुमको अपनी मूर्ति कला का रंग दिखाना है-
अनुशासन का हाथ-हथौड़ा उर में उनके छोभो-
नीति-वचन की चोट लगाकर छड़-छड़ पेनी-पेनी-
सुन्दरता की मूरत गढ़कर तुझे दिखाना है-
ओ शिल्पी ! तुमको अपनी मूर्ति कला का रंग दिखाना है...
