हमार मातल मल्लहवा जाल बीनेला...बिहार से मछुआरा लोकगीत
जिला-मुजफ्फरपुर, बिहार से सुनील कुमार मछुआरा समाज में प्रचलित एक लोकगीत प्रस्तुत कर रहे हैं:
हमार मातल मल्लहवा जाल बीनेला-
झींगा मारे, रोहू मारे और मारे बोआरी-
दिन भर रहे नदी किनारे रात को पीये ताड़ी-
हमार मातल मल्लहवा जाल बीनेला-
तीन-तीन छींटा भात खाए हडिया एइसन पेट-
पैदल जाए लोटा लेके रहरी के खेत-
हमार मातल मल्लहवा जाल बीनेला-
चारि दिन चली किन लोग से करे यारी-
दिन भर रहे चुपचाप रात को देवे गारी-
हमार बैरिन मल्लाहनियाँ बात बोलेला-
हमार मातल मल्लहवा जाल बीनेला...
