जाग उठी लेकर अंगड़ाई धरती हिन्दुस्तान की...देशभक्ति गीत
मंडला, मध्यप्रदेश से सग्गन शाह मरकाम एक देशभक्ति गीत प्रस्तुत कर रहे हैं:
जाग उठी लेकर अंगड़ाई धरती हिन्दुस्तान की-
राष्ट्र यज्ञ हो रहा आज बेला आई बलिदान की-
रणभेरी बजी तो चल पड़ी बहादुरों की टोलियां-
गूँज रही है दिशा-दिशा में जय भारत की बोलियां-
उमड़ चला पौरुष का पारावार न कोई रोकना-
बढ़ने वालों का उत्साह बढ़ाना है मत टोकना-
चमक उठी कण-कण चिंगारी आज आत्मसम्मान की-
जाग उठी लेकर अंगड़ाई धरती हिन्दुस्तान की-
गंगा-यमुना की माटी को माटी कभी ना मानना-
ब्रह्मपुत्र की घाटी को तुम घाटी कभी ना जानना-
गूंज रही हैं दिशा-दिशा में जय भारत की बोलियाँ
अमर-शहीदों के माथे का चन्दन इसका धूल है-
मातृभूमि पर न्यौछावर होते सब इसके फूल है-
कण-कण से आवाज है आती सब इसके अभिमान की-
जाग उठी लेकर अंगड़ाई धरती हिन्दुस्तान की-
उठो ! हिमालय-विन्ध्याचल की गूँज रही ललकार है-
भारत माता के गौरव से परिचित सब संसार है-
आज शत्रु के लिए काल है बच्चा-बच्चा देश का-
है अंत अब दुश्मन के अहंकार-आवेश का-
स्वतंत्रता की बलिवेदी पर बाजी जीवन-प्राण की-
जाग उठी लेकर अंगड़ाई धरती हिन्दुस्तान की...
