मोर संग चलौ रे, मोर संग चलौ रे...छत्तीसगढ़ी गीत
शिवलाल उसेंडी छत्तीसगढ़ी भाषा में एक गीत गा रहे हैं. गीत में सामूहिक एकता पर बल दिया गया है:
मोर संग चलौ रे, मोर संग चलौ रे-
वो गिरे थके अब के मन, औ करे-डरे मन के मन-
मोरे संग चलौ रे, मोरे संग चलौ जी-
हम रहिया कस जोड़ छाँव में मोरे संग बैठ जुड़ा लौ-
पानी पी लौ मैं सागरिया दुःख-पीरा बिखरा लौ-
कहां जाहु बड़ी दूर है गंगा, पापी इहाँ तरौ रे-
मोरे संग चलौ रे, मोरे संग चलौ रे...
