जल-जंगल-जमीन, जल-जंगल-जमीन, ये बहना के अपना लो छीन...संघर्ष गीत
ग्राम -नोनारी, जिला-रीवां से राम प्रसाद आदिवासी एक जनगीत प्रस्तुत कर रहे हैं.
जल-जंगल-जमीन, जल-जंगल-जमीन-
ये बहना हक़ अपना लो छीन-
संविधान कहता है सबको जीने का हक़ है भारी, कोई सकता न छीन-
ये बहना हक़-
वन संचुरी बहुत है प्यारी, लूटा खेत-जमीन हमारी-
ये है गड़बड़ मशीन, ये बहना हक़-
चमचों-दलालों को डंडा से मारो, हाँ भाई जोर से मारो !
कब्जा कर लो जमीन, ये बहना हक़-
भूमि का हो बंटवारा फिर से, महिला-पुरुष बराबर हक़ से-
अरे बनेगी नई पहचान, ये बहना हक़ अपना लो छीन.
