बिन जंगल के सूना लागे जंगल राखो रे : एक गीत
हाय संगी जंगल राखो यार
बिन जंगल के सूना लागे जंगल राखो रे
पहले राहे भारी जंगल भारी हार पहाड़
अब तो जाके देखो भैया हो गए बंटाढार
जंगल से तो शिक्षा संगी जंगल से तो आस
जंगल से तो मानसून और जंगल से बरसात
जौन गांव में जंगल नई है हाथ धरे पछताए
जीती कोटी मिलता नहीं ए कंदा को ललाए
सोमनाथ
