हमें भी चाहिए खिलौने खेलने के लिए...एक बाल मज़दूर की कविता
हमें भी चाहिए खिलौने खेलने के लिए
पर हमें मिलती है मिट्टी और ईंट
हमें भी चाहिए कोपी किताब पढने के लिए
हमें भी देखना है कार्टून और सिनेमा
पर हमें देखने को मिलता है
अपने छोटे छोटे भाई बहनों के देखरेख का सिनेमा
हमें भी चाहिए नए जूते
पर हमें मिलता है नंगे पाँव चलने का अनुभव
हमें भी चाहिए माँ का प्यार और पिता का दुलार
पर हमें मिलती है माँ बाप के काम में हाथ बंटाने की जिम्मेदारी
हमें भी देखना है मेले और चिड़ियाघर
पर हमें देखने को मिलता है
चिमनी से निकलता हुआ धुँआ और ईंटो का ढेर
ज्ञान
