चिरइया बोले रे, साजा के झाड़ मा चिरइया बोले ना...छत्तीसगढ़ी गीत
ग्राम- करतिहा, पोस्ट- करगीकला, तहसील- कोटा, जिला- बिलासपुर, से शत्रुघ्न सिंह नेताम एक गीत प्रस्तुत कर रहे हैं. गीत में साजा देव और बड़ा देव के महिमा का वर्णन है. साजा एक वृक्ष, जिन्हें आदिवासी समाज देवतुल्य समझते हैं और पूजा-पाठ करते हैं :
चिरइया बोले रे...साजा के झाड़ मा चिरइया बोले ना – बिना बड़ा देवता के अब ना कोई नहीं हौ रे – चिरैया बोले रे...
जंगल-जंगल झाड़ लगे हैं, झाड़ मा साजा पेड़ – बड़ादेव झाड़ मा साजा पेड़ – जंगल-जंगल झाड़ लगे हैं, झाड़ मा महुआ पेड़ – बड़ादेव झाड़ मा महुआ पेड़ – चिरइया बोले रे...साजा के झाड़ मा कोयलिया बोले ना-
बिना बड़ा देवता के अब ना कोई नहीं हौ रे – चंदा-सूरज-धरती-हवा-आकाश-
अनगिनत ये चलती नदिया रे-
चिरइया बोले रे...साजा के झाड़ मा कोयलिया बोले ना-
जंगल-जंगल झाड़ लगे हैं, झाड़ मा तेंदू पेड़ – बड़ादेव झाड़ मा तेंदू पेड़ – चिरइया बोले रे...साजा के झाड़ मा कोयलिया बोले ना-
जंगल-जंगल झाड़ लगे हैं, झाड़ मा साजा पेड़-
बड़ादेव झाड़ मा साजा पेड़-
कोयली, मैना, कुर्की, पारा, डोंगरी और पहार – ये चिरइया बोले रे-
साझा के झाड़ मा कोयलिया बोले ना...
