बहुत कटी है, अब ना कटेगी, भूखे पेट उमरिया...संघर्ष गीत
ग्राम-सरईमाल, जिला-डिंडोरी, मध्यप्रदेश से संतोष कुमार अहिरवार, एक संघर्ष गीत प्रस्तुत कर रहे हैं:
बहुत कटी है, अब ना कटेगी, भूखे पेट उमरिया-
अबकी हमने ठान के आए, लेंगे हक़ अधिकरिया-
अपना लेंगे हक़ अधिकरीया...
भूखा-प्यासा रहकर घर में, अब हमको नहीं मरना-
अब सड़कों पर हक़ के खातिर, जान न्यौछावर करना-
गोली मारो-जेल में डालो, चाहे कोई सजा दो...
या फिर मेरी बात मान लो...! जीवन मेरा लौटा दो...!
अपना लेंगे हक़ अधिकारिया...
हमने भी तो लहू बहाया, देश आजाद कराया-
तब फिर मेरे हिस्से में क्यों, भूख-प्यास-गम आया-
अपना लेंगे हक़ अधिकारिया...
घर में बिटिया सयानी बैठी, तात-मात अकुलाए-
छोटे-छोटे लालों को हम, भूखा छोड़के आए-
कान खोलकर सुन लो मेरे, कुर्सी के दीवानों-
तेरा नाटक खूब चला अब , खैर न अपनी जानों...
अपना लेंगे हक़ अधिकरिया...
पेट भी खाली-होंठ भी सूखे, आँखें भी हैं गीली-
हमको भी अब अपनी दुनिया, करना है चमकीली-
अपना लेंगे हक़ अधिकारिया...
आदिवासी इस धरती का, मालिक है रखवाला-
उसको भूमिहीन बनाकर, छीना गया निवाला-
दलित-हरिजन आज भी हैं, सम्मान का भूखा-प्यासा-
मिले मनुवादी से मुक्ति, लेकर जीता आशा-
अपना लेंगे हक़ अधिकरिया...
