सबसे बुरा होता है बेचारा बन जाना...
कानपुर, उत्तरप्रदेश से के.एम. भाई एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं:
गरीब होना बुरी बात नहीं है-
फटेहाल में रहना बुरी बात नहीं है-
सूखी रोटी खाना बुरी बात नहीं है-
सबसे बुरा है हाथ जोड़ कर बेचारा बन जाना-
अमीरों की अय्यासी बुरी बात नहीं है-
कूड़े के ढेर में भोजन का सड़ना बुरी बात नहीं है-
मुनाफाखोरी की लूट बुरी बात नहीं है-
सबसे बुरा है सर झुकाकर बेचारा बन जाना-
शासन की नाफ़रमानी बुरी बात नहीं है-
नौकरशाहों का भ्रष्टाचारी होना बुरी बात नहीं है-
लोकतंत्र में कालाबाजारी होना बुरी बात नहीं है-
सबसे बुरा है मुंह बंद कर बेचारा बन जाना-
सबसे बुरा होता है...
