धरती आहा खिले, नाय भूले जी...भीली प्रकृति गीत
नारायण भाई राठवा गुजरात के छोटा उदयपुर जिले के कवाट के गुजारिया एकलव्य मॉडल स्कूल से एक गीत गा रहे हैं. गीत धरती माँ और प्रकृति पर आधारित है:
नाय भूले जी अमो, नाय भूलेजी यो
धरती आहा खिले, नाय भूले जी
ये धरती पे पानन फूले, पानन फूले
मन में आवे तहां, पान तोड़े जी
पाय ते जे, नाय भूले जी
नाय भूले जी...
ये धरती पे अन्न न पाएं, अन्न न पाएं
अन्न न पाएं
मन में आवे तहां, अन्न पाएं
फूल तोड़ें जी, नाय भोलजे
नाय भूले जी...
ये धरती पे, जेर बाधा
जेर बाधा, जेर बाधा
हिले-मिले-ने दोष काढ्जे
जेवें नाए जे, नाय भूले जी
नाय भूले जी...
