हम तो आदिवासी मोरे भइया, जंगल के आदिवासी...
ग्राम-मरकाढाना, ब्लाक-घोड़ाडोंगरी, जिला-बैतूल, (म.प्र.) से अनीता जी एक गोंडी गीत गा रही हैं यह गीत आदिवासी समाज की जीवन पद्धति से जुड़ा है कि आदिवासी किस तरह से जंगल-पहाड़ में अपना जीवन बिताते हैं:
हम तो आदिवासी मोरे भइया, जंगल के आदिवासी
कुटकी और कोदो से कर ले गुजारा
हम तो आदिवासी मोरे भइया...
कुटकी और कोदो से करले गुजारा
कर ले गुजारा रे, कर ले गुजारा
हम तो आदिवासी मोरे भइया, बैतूल का लिखरे वाले
कोया और पैसा से कर ले गुजारा
हम तो आदिवासी मोरे भइया, बैतूल का लिखरे वाले.....
