डॉ बिनायक सेन की रिहाई पर एक साथी मज़दूर की लिखी कविता
दो साल पह्ले सरकार ने एक बिनायक सेन को नक्सली बताकर अंदर किया था
जेल में रहकर ही देश में ही नहीं विदेशों में भी लाखों बिनायक पैदा कर दिए
आज पूरे देश के सरकार को झकझोर कर रख दिया
डॉ बिनायक सेन नक्सली हैं तो मैं भी नक्सली हूं गरजना शुरू किया
हम आ रहे हैं तुम्हारा जेल का नाप लेने
हम आ रहे हैं तुम्हारे फांसी के फंदे का नाप लेने
तुम्हारे एके 47के गोलियों को सीने में सजाने
कम पड जाएगा हमारा बनाया जेल
कम पड जाएगा हमारा बनाया फांसी के फंदा
कम पड जाएगा हमारा बनाया एके 47 की गोलियां
ऐ खून पीने वाले भेडियों
मत ललकारो इंसानों को
मत तडपाओ मेहनत करने वाले को
जिस दिन जनता जाग जाएगी
तुमको मसलकर पीस डालेगी
अरे सौ में पांच ही तो हो
चटनी बनाकर चाट जाएगी
भगीरथ वर्मा
