हमें लूट रही मिलकर जा काली सरकार...
हमें लूट रही मिलकर जा काली सरकार, हमें लूट रही...
जागो-जागो नौजवान, अपने हक़ खों पहचान
अपने हक़ खों पहचान, काहें बना तू अज्ञान
हमें लूट रही .........
साथ नइयां जमीन, चलो जंगल लेई छीन
चलो जंगल लेई छीन, गाँव हो गए हैं दीन
हमें लूट रही ..........
हो गए चौंसठ साल, हाल हो गयो बेहाल
हाल हो गयो बेहाल, खूब मूटा गे दलाल
हमें लूट रही ...........
रहे एकता में गाँव, तबै चलिहीं सबके नांव
तबै चलिहीं सबके नांव, बनावो सुन्दर सा गाँव
हमें लूट रही ....................
सीजीनेट है हमारी, सुन लो कान खोल अधिकारी
सुन लो कान खोल अधिकारी, अब ना चलिहें भ्रष्टाचारी
हमें लूट रही .................
