भुरसारो डंगुर हंडाले, रोज-रोज डंगुर हंडाले...गोंडी महुआ गीत
ग्राम-आलमपुर, जिला-बैतूल (म.प्र.) से नीलम यादव जी एक गोंडी गीत गा रही हैं. जब महुआ बीनने के लिए सुबह-सुबह जंगल जाते हैं तब इस गीत को गाते हैं:
भुरसारो डंगुर हंडाले, रोज-रोज डंगुर हंडाले
ठंडो-ठंडो डंगुर डाले, हो यणबाई ठंडो-ठंडो डंगुर डाले
रोज-रोज डंगुर हंडाले, भुनसारो डोमरा पराले
डंगुर हंडाले हो यणबाई, रोज-रोज डंगुर हंडाले
ठंडो-ठंडो डंगुर डाले, हो यणबाई ठंडो-ठंडो डंगुर डाले..
चौडियानी कुचड़ी तिन्दाले, रोज-रोज डंगुर हंडाले
रोज-रोज डंगुर हंडाले, हो यणबाई ठंडो-ठंडो डंगुर डाले
