सिर्फ कागज का नक्शा नही है देश...
उन्हें विरासत में मिली है सीख कि देश एक नक्शा है कागज का
चार फोल्ड कर लो तो रुमाल बनकर जेब मैं आ जाये
देश का सारा खाजाना उनके बटुए में है
तभी तो कितनी फूली दिखती है उनकी जेब
इसलिए वो करते घोषणाएं कि हमने तुम पर
उन लोगो के जरिये खूब लुटाए पैसे
मुट्ठियाँ भर-भर के
विडंबना ये कि अविवेकी हम
पहचान नहीं पाए असली दाता को
उन्हें नाज है कि त्याग और बलिदान का
सर्वाधिकार उनके पास सुरक्षित है
इसलिए वे चाहते हैं कि उनकी
महात्वाकांक्षाओं के लिए हम भी
हँसते-हँसते बलिदान हो जाएं
और उनके ऐशो-आराम के लिए त्याग दें
स्वप्न देखना,त्याग दें प्रश्न करना
त्याग दें उम्मीद रखना
क्योंकि उन्हें विरासत में मिली सीख,
इन टेढ़ी-मेढ़ी रेखाओं से
कागज़ पर अंकित
देश एक नक्शा मात्र है...
