मिलाए कौन हे उज्जर चाउर में गोटी...छत्तीसगढ़ी जागरूकता गीत
कालिंदी साहू बिलासपुर छतीसगढ़ से हैं एक छत्तीसगढ़ी जागरूकता गीत गा रही हैं। सन्दर्भ है गरीबों का शोषण मसलन जब कड़े काम लिए जाते हैं और पूरी मजदूरी नहीं दी जाती और हर तरह से गरीबों का खून चूसा जाता है. गीत के बोल हैं-
मिलाए कौन हे उज्जर चाउर में गोटी
नंगाई कौन हे हमार बांटा रोटी
पहिली रहिस पिरकी अब होंगी से फोड़ा
हमरै छानी ऊपर भुजै उन होरा
छोरत कौन है हमरै अंचरा के मोती
नंगाए कौन ………।
हमरेच खावे अऊ हमीला देखावे
बड़े-बड़े आंखी अऊ हमीला देखावे
तीरत कौन हे हमार तन के निंगोटी
नंगाए कौन ………।
चुहकिस-खुसियार असन बनादिस होही
जांगर थक जाहीं तब खेत कौन बोहीं
नंगाए कौन हे हमार बांटा रोटी
मिलाए कौन हे उज्जर चाउर में गोटी
