सिपाड़ी पैसा मांगे तो आमु लात देनारा ...भिलाली जनजागृति गीत
झाबुआ से शंकर आदिवासी जी जो कि आदिवासियो के अधिकार के लिए अपनी बात रखे है और वो एक भिलाला जनजागृति गीत गा रहे है :
केंवट बाजार जाना रा हर का गोदा लाउना रा
टेमे-टेमे खिरोड़ी सिपाड़ी पैसा मांगे तो आमु लात देनारा
जंगल में रहता आमु लुटाई गया रे
भोला आदिवासी हम ठगाई गया रे ।
आमु एक जुटे करदेने सुपाड़ी नहीं दे
हट गुडी हट हट गुडी हट
विन्जरावे पैसा मांगे रे सिपाडी वे कुकडी मांगे रे
आमु पैसा नहीं देंगे कुकडी नहीं देंगे
