हमनी किसनवन के रचले करमवा...भोजपुरी किसान गीत
हमनी किसनवन के रचले करमवा
कवले कलम से विधाता हो राम
ओने दाही एने सूखा मेहर लरिका मरे भूखा
हमरा न कुछहू बुझाता हो राम
खेतवा में मरी जड़ी पेटवा न काम करी
सहुआ के करज बड़े पल छीने घड़ी घड़ी
बन्हकी में जिंदगी धराता हो राम
