बाल दिवस है पुकारता!
सुन ए मानव
घर का आंगन है बेटी
चेहरे की मुस्कान है बेटी
संदूक का धन है बेटी
रिस्तों की डोर है बेटी
माँ की लाज है बेटी
पिता का ताज है बेटी
परिवार का आधार है बेटी
समाज का श्रृंगार है बेटी
राष्ट्र का सम्मान है बेटी
दिए का प्रकाश है बेटी
पूर्णिमा का चाँद है बेटी
पेड़ो की डाल है बेटी
धूप में छाँव है बेटी
नदी में नाव है बेटी
जीवन की साँस है बेटी
कुदरत का उपहार है बेटी
तेरी बेटी-मेरी बेटी
हम सबकी बेटी-हम सबकी बेटी
सारे जहां से निराली है बेटी
सारे जहां से निराली है बेटी
