आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में: वैद्य के गुण और कर्त्तव्य
डा. एच.डी गांधी दोहे के माध्यम से वैद्यों के गुणों और कर्तव्यों के बारे में बता रहें है....
वैद्य रोगिया, परस्पर अन्यो आश्रित संग ।
परिचित होते ही बने हर पारिवारिक अंग ।।
हर पारिवारिक अंग वैद्य की जिम्मेदारी ।
औषधि देवे अल्प फ़ायदा होवे भारी ।।
नाडी देखे ध्यान से करे निदान अचूक ।
चाहे रोगी रंक हो या धरती का भूप ।।
या धरती का भूप भेद न मन में लावे ।
पथ्यापथ्य, सुझाव उचित अनुपात बतावे ।।
विद्या में पारंगत निपुण शास्त्रों के ज्ञाता ।
ईर्ष्या, द्वेष, प्रमाद, निकट न जिसके आता ।।
लोभ मोह से मुक्त सदा रोगी हित चाहे ।
हंसमुख सरल स्वभाव काम सबके ही आवे ।।
चाहे दिन या रात समय असमय न देखे ।
देय सांत्वना पूर्ण हरे परिजन की पीड़ा ।
रोग करे निर्मूल मिटा शंका का कीड़ा ।।
राज्यश्रय से दूर स्वयं का नीड़ बनावे ।
अपने गुरु को छोड़ किसी से न भय खावे ।।
उचित समय पर खोद जड़ी बूटी घर लावे ।
शास्त्र नियम अनुसार औषधि स्वयं बनावे ।।
अहंकार से दूर वैद्य न हो बडबोला ।
हरदम राखे संग जड़ी बूटी का झोला ।।
सादा भोजन करे नियम संयम सब पाले ।
गुरु चरणों से ध्यान कभी न पल भर टाले ।।
मिले सहज सम्मान और यश कीर्ति पावे ।
मातृभूमि का मान चहूँ दिशा में फैलावे ।।
