खंड- खंड बिखरा पड़ा आह उत्तराखंड...
मौसम की गुस्ताखियां नव का तोप प्रचंड
खंड- खंड बिखरा पड़ा आह उत्तराखंड |
बादल ने फटकर किया ये कैसा उत्पात
कितने दीपक बुझ गए हुई सरा बुराद |
ये प्राकृतिक आपदा खडी व्यवस्था मौन
उस मौसम की गुत्थिया सुलझाये अब कौन |
चीत्कार चारो तरफ चौतिस हाहाकार,
मौत कर रही तांडव शांस शांस दुस्वार |
बड़ी भयंकर त्रासदी बड़ा भयंकर काल
कब आओगे लौटकर ऊँचे आँख सवाल |
उत्सव का माहौल था श्रद्धा की थी धूम
पलक झपकते धस गए मलवे में मासूम |
पल भर पहले थे सभी एक दूजे के साथ
एक झटके में आह क्यू छूटे सबके हाथ
नाक कान और उंगलिया काट-काट कर चोर,
लाशों को भी लूटते बनकर आदमखोर |
दल सब दल-दल में फसे बस खुद का गुणगान,
लासों में भी लग रहे वोटों के अनुमान |
छेड़ छाड़ का इस तरह देगी प्रकृति जवाब,
पता न था यू लाएगी जीवन में सैलाब |
मौत कर रही ताण्डव गिद्ध मनाते जश्न,
धर्म यात्रा ने किये खड़े अनगिनत प्रश्न |
अशोक अंजुम
