अपने लिए जीना तो क्या जीना, औरों के लिए मरना सीखो
अपने लिए जीना तो क्या जीना औरों के लिए मरना सीखो
सतजुग में शंकर जी ने जनता के लिए त्रिशूल उठाया
दुष्ट दानव को मारकर देवताओं को आज़ाद कराया
त्रेताजुग में राम्चन्द्र जी ने जनता के लिए धनुष उठाए
द्वापरयुग में श्रीकृष्ण् ने जनता के लिए चक्र उठाए
अंग्रेज़युग में सुभाषचन्द्र ने जनता के लिए बंदूक उठाए
दुष्ट अंग्रेज़ को मार भगाकर जनता को आज़ाद कराया
स्वतंत्र भारत में शंकर गुहा नियोगी ने जनता के लिए आवाज़ उठाए
दुष्ट उद्योगपतियों ने मिलकर उनको भी गोली मरवाए
