अरी लकड़ी ! मत बनना जालिम राजा की कुर्सी...
अरी लकड़ी !
बनकर सहारा दिखाना सही रास्ता भटके अंधे बूढ़े को
बीहड़ लोगों के जंगल में मूसल बनकर धान कूटना
उछल उछल कर माँ के हाथों में,
बनकर टेक लगे रहना भोली के छपर में
मत बन कर आना लठ मुछड पहलवान के हाथों में
अरी लकड़ी!
कुम्हार का थाप बनकर मुझे ढालना ऐसे साचे में
जो झेल सकूँ वक्त के थपेडों की मार
फिरना मेरे मीठे फसलों पर
अरी लकड़ी !
काठी बनना, घोडा बनना, लटटू बनना
बच्चों के खेलों की बनना कठपुतली
बनकर नाव पार उतरना हमें दुनिया के उफनते समुद्र से
अरी लकड़ी !
बिगडैल हाथी मत बनना मत बनना जालिम राजा की कुर्सी.
दिल्ली से रमेश प्रजापति- 9891592625
