एक दिन मैं बाजार गई बहन महंगाई मुझसे टकराई...
एक दिन मैं बाजार गई बहन महंगाई मुझसे टकराई,
मैंने उससे पूछा – क्या हाल है ?
उसने इठला कर कहा- वही हड्डी वही चाल है !
मैंने कहा तुम्हारी भार से जनता रही है मर,
टूट जाती है उसकी कमर !
तुम दिन पर दिन आसमान पर जा रही हो,
जरा ए तो बताओ धरती पर कब आ रही हो ?
वह बोली – इसमे मेरा क्या दोष ,
जनता को भी कहा है होश !
कुछ धरती तो गरीबी ने घेर राखी है,
आसमान पर ना जाऊ तो कहा जाऊं ?
तुम गरीबी हटा दो , नेताओं से मुझे मुक्ति दिल दो ,
धरती पर वापस लौट आउंगी !
