हे मूर्ख इंसान क्यूँ करता है अभिमान...कविता

सीजीनेट के साथियों को एक कविता सुना रहे हैं:
हे मूर्ख इंसान क्यूँ करता है अभिमान-
मत काटो जंगल पेड़ों में भी है जान-
हे मूर्ख इंसान क्यूँ करता है अभिमान-
मत काटो जंगल पेड़ों में भी है जान...

Posted on: Jan 07, 2022. Tags: CUT POEM DONT TREE