जिन्दगिया के खेला समझ में आवे...लोकगीत-
जिला-गाजीपुर (उत्तरप्रदेश) से शैलेष यादव एक भोजपुरी लोकगीत सुना रहे हैं:
मन सपना के महल बनाबे दुनिया ढेला चलाबे-
जिन्दगिया के खेला समझ में आवे-
जब-जब दिन बिगड़े पर होला-
केहू रोक न पावे-
का जाने का लीखल किस्मत में-
केकरो पता नही पाई जिन्दगिया के खेला समझ में आवे...(AR)
