हल चला के खेतो को मैंने ही सजाया रे...गीत-
जिला-पलामु (झारखंड)अंजनी कुमारी गीत सुना रही है:
हल चला के खेतो को मैंने ही सजाया रे-
क्यों सोऊ बुके पेट की मेरे लिए का मन ये-
गेंहू,चावल,धानो को मैंने ही उगाया रे-
ईट कोपा पकाया मैंने बंगला बनाया रे-
क्यों सोऊ बुके पेट की मेरे लिए का मन ये-
कपास को ऊगाया मैंने कपड़ा बनाया रे – क्यों सोऊ बुके पेट की मेरे लिए का मन ये...(RM)
