स्वास्थ्य स्वर: यह सर्वसुलभ उपयोगी प्राकृतिक ओषधि है...ओषधि
जिला-छिंदवाड़ा से वेध्यराज संजय ओषधि बता रहे है|
1.गो मूत्र -की विशेषता है ,गो मूत्र सर्व रोग नाशक और सतोगुण युक्त है|रक्त को तरल व शुद्ध बनाये रखता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है|यह शारीर के शर्बी को घटाता है ,ह्रदय ,अम्लता का नाश करता है ,पतरी को गलाता है |मस्तिक और ह्रदय को बल प्रधान करता है |शारीर की कार्य क्षमता को बड़ाता है और तापमान को नियंत्रित करता है |यह सर्व सुलभ उपयोगी प्राकृतिक ओषधि है|
2.पंचागोत्र बनना -गाय के दूध ,दही ,घी ,गोबर और गोमाय रस ,गो मूत्र का एक निचित अनुपात में मिश्रण पंचागोत्र कहलाता है | के बारे में हमारे पुराने शाश्त्रो में कह गया है ,इसके सेवन से मानव के समस्त पाप नाश रोगों का नाश होता है इसका सेवन करना चाहिए|पंचागोत्र परम पवित्र रसायन है ह्रदय, बल, बुध्दि,प्रदान करने वाला है|
