दुःख तो अपना साथी है...गीत-
सीजीनेट श्रोता भीम प्रसाद एक गीत सुना रहे हैं:
दुःख हो या सुख-
जब सदा संग रहे ना कोय-
फ़िर दुःख को अपनाईये-
के जाए तो दुःख ना होय-
राही मनवा दुःख की चिंता क्यूँ सताती है-
दुःख तो अपना साथी है-
सुख है इक छाँव ढलती, आती है, जाती है-
दुःख तो अपना साथी है... (AR)
