धन्य-धन्य लुई साहे बेजि आप है...गीत-
अमरेन्द्र जिला-सिद्धार्थनगर (उत्तरप्रदेश) से एक गीत सुना रहें है:
धन्य-धन्य लुई साहे बेजि आप है-
की ये ब्रेल लिपि का अभिष्कार है-
चार जनों रे अठरा सौ नव में आये थे-
छ: मोती के बल पर पढना सीखें लायें ये फेर-
इसलियें सभी लोग करतें गुण गान है-
चार जनों रे अठरा सौ नव में आये थे-
धन्य-धन्य लुई साहे बेजि आप है...(183530) GT
