मैया बोलती है तुम सबसे बड़े मेरे भक्त हो लकड़हारे की कहानी-
जिला-जसपुर, (छत्तीसगढ़) से सूरदास पैकरा कहानी सुना रहे है|
लकड़हारे की कहानी- प्रतिदिन एक लकड़हारे ने जंगल जाया करता था| और एक दिन की बात है की वह लकड़ी काटते -काटते अपनी कुल्हाड़ी को पानी में गिर जाता है|उसके बाद उसे देख कर लकड़हारे ने घबराहट हो जाता है| और वह रोने लगता है, उसके बाद पानी के पास जाता है फिर रोते वक्त माया प्रकट होती है| फिर माया कहती है लकड़हारे तुम्हे क्या हुआ |लकड़हारे ने जवाब देते है, मेरा कुल्हाड़ी गिर गीई है पानी में, तो मैया बोलती है ठीक है तुमे घबराने की कोई बात नहीं है| उसके बाद मैया ने सबसे पहले सोने की कुल्हाड़ी निकलती है और कहती है की यह कुल्हाड़ी क्या तुम्हारी है लकड़हारे ने कहता है नहीं यह कुल्हाड़ी मेरी नहीं है|उसके बाद चांदी की कुल्हाड़ी निकलती है ,लकड़हारे ने कहता है नहीं यह कुल्हाड़ी मेरी नहीं है ,उसके बाद हीरे की कुल्हाड़ी निकलती है फिर वही जवाब देता है नहीं कुल्हाड़ी मेरी नहीं है|उसके बाद सबसे लास्ट में लोहे की कुल्हाड़ी निकलती है और वह बोलता है हाँ यही मेरी कुल्हाड़ी है उसके बाद मैया बोलती है तुम सबसे बड़े मेरे भक्त हो ,तो चारो कुल्हाड़ी तुम्हारी हो गयी है, और तुम इसे अपने जीवन में रखे रहना और अपने जीवन में सुख से काम करना, (183353) GT
