आई ऋतु जब बसंत की तन मन सब खिल उठा...कविता-
जिला-बड़वानी मध्यप्रदेश से सुरेश कुमार कविता सुना रहे है:
आई ऋतु जब बसंत की तन मन सब खिल उठा-
तरु तरु डाली डाली अंग अंग महक उठा-
आई ऋतु जब बसंत की कोयल छिप कर-
आम की पत्तो में मनोहर गजल की कुक से-
सबके मृदुल ह्रदय को छू गयी... D
