जख्मों को हवा दोगें की याद आएगी...गजल-
ग्राम+पोस्ट-अलहिया, जिला-बांधा, उत्तरप्रदेश से सुरेन्द्र पाल एक गजल सुना रहें है:
जख्मों को हवा दोगें की याद आएगी-
किसी को भी दगा दोगें मेरी याद आएगी-
खीचों गे तो गिरी पल मेरी तस्बीर बार बार-
फिर उसको मिताओगें मेरी याद आएगी-
तरिया बहते पानी परछाई देखू कैसे-
जुल्फों को सम्हालोगी मेरी याद आएगी-
जख्मों को हवा दोगें की याद आएगी...(182615) GT
