मुश्कुराते रहो गुनगुनाते रहों गम को छुपाते रहों...हिन्दी गजल-
ग्राम-कुमारता,जिला-रायगढ़-राज्य-छत्तीसगढ़ से महेश कुमार सिधार हिन्दी गजल
सुना रहें हैं:
मुश्कुराते रहो गुनगुनाते रहों गम को छुपाते रहों
जिन्दगी भर यूँ ही गीत गाते रहों
जिन्दगी को यूँ ही आजमाते रहों
हंसते हंसते यूँ ऐ मेरे हम सफर
कट जायेगा सफर मंजिल आयेगी नजर
